बुधवार, 14 अप्रैल 2021

Social Science Chapter-2 (संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक)

 Chapter 2 संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक – RBSE Social Science Solutions 





पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [Textbook Questions Solved]


संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)


प्रश्न 1.

गुलाम वंश का अन्य नाम क्या है?

उत्तर:

यामिनी या इल्बरी वंश ।


प्रश्न 2.

रजिया सुल्तान ने याकूत को किस पद पर नियुक्त किया था?

उत्तर:

अमीर अखूर (अश्वशाला का प्रधान)।


प्रश्न 3.

‘लौह एवं रक्त’ की नीति को लागू करनेवाला शासक कौन था?

उत्तर:

बलबन।


प्रश्न 4.

बाबरनामा का फ़ारसी में अनुवाद किसने किया था?

उत्तर:

अब्दुर्ररहीम खानखाना।


प्रश्न 5.

“अँड ट्रंक रोड’ किस शासक ने बनवाई थी?

उत्तर:

शेरशाह सूरी।


प्रश्न 6.

पानीपत की दूसरी लड़ाई कब हुई थी?

उत्तर:

1556 ई०


प्रश्न 7.

हेमू ने कौन-सी उपाधि धारण की थी?

उत्तर:

राजा विक्रमजीत की उपाधि धारण की थी।


प्रश्न 8.

विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध कब हुआ था?

उत्तर:

1576 ई० में


प्रश्न 9.

अकबर ने कौन-से धर्म का प्रवर्तन किया था?

उत्तर:

दीन-ए-इलाही।


प्रश्न 10.

बहमनी साम्राज्य का संस्थापक कौन था?

उत्तर:

हसन (जफरशाह)।


प्रश्न 11.

‘अकालतख्त’ का निर्माण सिखों के किस गुरु ने करवाया था?

उत्तर:

सिखों के छठे गुरु हरगोविन्द सिंह ने।


प्रश्न 12.

शिवाजी का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था?

उत्तर:

रायगढ़ के दुर्ग में।


प्रश्न 13.

हम्मीर चौहान कहाँ का शासक था?

उत्तर:

रणथम्भौर का शासक था।


प्रश्न 14.

‘अमर सिंह का फाटक’ कहाँ पर है?

उत्तर:

दिल्ली के लाल किले में।


संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)


प्रश्न 1.

मुहम्मद तुगलक की पाँच योजनाओं के नाम लिखिए।

उत्तर:

मुहम्मद तुगलक की पाँच योजनाओं में दोआब में कर वृद्धि, देवगिरी को राजधानी बनाना, सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन, खुरासान पर आक्रमण, कराचल की ओर अभियान प्रमुख है।


प्रश्न 2.

‘सिकंदरी गज’ के बारे में बताइए।

उत्तर:

सिकंदर लोदी ने एक गज चलाया जो प्राय: 30 इंच का होता था। यह गज लंबे समय तक सिकंदरी गज के नाम से चलता रहा। इस गज का उपयोग भूमि की नाप के लिए किया गया था जिससे कि भूमिकर को आसानी से वसूला जा सके।


प्रश्न 3.

फरीद को शेर खाँ की उपाधि किसने एवं क्यों दी? ।

उत्तर:

दक्षिणी बिहार के तत्कालीन शासक बहार खाँ ने निहत्थे फरीद द्वारा शेर मार दिए जाने पर उसे शेर खाँ की उपाधि प्रदान की।


प्रश्न 4.

विजयनगर साम्राज्य का परिचय दीजिए।

उत्तर:

संगम के पाँच पुत्रों ने जिसमें हरिहर तथा बुक्का सर्वाधिक प्रसिद्ध थे, तुंगभद्रा नदी के उत्तरी तट पर विजयनगर राज्य की नींव डाली। वे वारंगल के काकतियों के सामंत थे। 1336 ई० में हरिहर तथा बुक्का ने विजयनगर साम्राज्य की नींव डाली थी, जो कि शीघ्र ही दक्षिण भारत का शक्तिशाली राज्य बन गया। हरिहर ने होयसल के सारे प्रदेश को 1346 ई० में विजयनगर के अधिकार में ला दिया। बुक्का 1346 ई० में अपने भाई हरिहर का उतराधिकारी बना। उसने 1377 ई० राज्य किया। सारे दक्षिण भारत, रामेश्वरम, तमिल व चेर प्रदेश तक बुक्का ने विजयनगर सम्राज्य को फैलाया।


प्रश्न 5.

राव शेखा के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर:

महाराव शेखा का जन्म 1433 ई० को हुआ था। इनके पिता मोकल एवं माता का नाम निर्वाण था। राव मोकल आमेर राज्य के अंतर्गत आने वाले नान के शासक थे। 1445 ई० में बारह वर्ष की उम्र में शेखा ने अपने पिता का उत्तरदायित्व सँभाला। आमेर के शासक उदयकरण ने शेखा को महाराव की उपाधि प्रदान की थी। 16 वर्ष की उम्र में मुल्ताने, सेवार, नगरचल के साखला राजपूत पर अचानक आक्रमण कर विजय प्राप्त करना शेखा का पहला सफल अभियान था।


1473 ई० से 1477 ई० में राव शेखा ने पन्नी पढ़ानों की सहायता से नोपसिंह जादू से दादरी और अन्य जाटू राजपूतों से भिवानी पर विजय प्राप्त की। उसने इस्तर खान से हांसी, हेदाखान कायमखानी से हिसार को जीतकर अपने राज्य की सीमा का विस्तार किया। 1449 ई० में आमेरसर को अपने राज्य की राजधानी बनाया। उसे जयपुर के कछवाहा वंश के उपवर्ग शेखावत का संस्थापक माना जाता है।


प्रश्न 6.

बन्दा बैरागी कौन था?

उत्तर:बन्दा बैरागी का मूल नाम माधोदास था। इनका 1670 ई० में राजपूत परिवार में जन्म हुआ था और गोदावरी के तट पर आश्रम में निवास करते थे। गुरु गोविन्द सिंह के दक्षिण प्रवास के समय इन्होंने स्वयं को गुरु का बन्दा कहा, अतः बन्दा बैरागी के नाम से पहचाने गए। गुरु की आज्ञा से वे गुरु की शेष कार्य पूरा करने पंजाब पहुँचे। बन्दा बैरागी ने वजीर खाँ को हराकर सरहिंद पर कब्जा कर लिया। सरहिंद की विजय से उत्साहित होकर सिक्खों ने अमृतसर, कालानौर, बटाला और पठानकोट पर अधिकार कर लिया।


पंजाब में मुगल प्रशासन समाप्त हो गया। नये मुगल बादशाह फारुखसियर ने सफदर खाँ के नेतृत्व में मुगल सेना बन्दा के खिलाफ भेजी। डेरा बाबा में लंबे समय तक घिरे रहने के बाद बंदा ने आत्मसमर्पण किया। दिल्ली में वह अपने सैकड़ों साथियों के साथ मौत के घाट उतार दिए गए।


संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)


प्रश्न 1.

दिल्ली सल्तनत के प्रशासन के बारे में बताइए।

उत्तर:

सल्तनत कालीन प्रशासन

(i) सुल्तानः सुल्तान की उपाधि तुर्की शासकों द्वारा प्रारंभ की गयी। राज्य की संपूर्ण शक्ति सुल्तान के हाथ में थी। | वह प्रधान न्यायाधीश, राजनीति एवं महत्व दोनों क्षेत्रों का अधिपति होता था।


(ii) अमीरः सुल्तान की शक्ति पर अमीर वर्ग का प्रभाव रहा। अमीरों के दो वर्ग तुर्क तथा गैर तुर्क थे।


(iii) केंद्रीय शासनः मजलिस-ए-खलअत मंत्री परिषद की तरह होती थी। वजीर, आरिजे मुमालिक, दीवाने इंशा, दीवाने

रिसालत इसके चार स्तंभ थे।


(iv) वजीरः वजीर का कार्यालय दीवाने-ए-विजारत कहलाता था। इसे वित्त विभाग कहा जा सकता है। मुस्तौफी (महालेखा परीक्षक), खजीन (खजाँची), मजम आदार (हिसाब संग्रहकर्ता) इस विभाग के कर्मचारी होते थे।


(v) दीवान-ए-मुस्तखराजः जलालुद्दीन खिलजी ने दीवाने वक्फ एवं अलाउद्दीन ने दीवान-ए-मुस्तखराज विभाग की स्थापना की थी। ये वित्त विभाग के अन्तर्गत ही आते थे। मुहम्मद बिन तुगलक ने भूमि को कृषि योग्य बनाने हेतु दीवाने-अमीर-कोही की स्थापना की।


(vi) दीवाने इंशाः शाही पत्र व्यवहार का दायित्व था।


(vii) दीवाने रियासतः इसका कार्य विदेश मंत्री की तरह था।


(viii) सेद्र उस सुदूरः धर्म विभाग का प्रमुख होता था।


(iv) काजी उल-कुजातः न्याय विभाग ।


(iX) वरीद-ए-मुमालिकः सूचना विभाग


प्रश्न 2.

सवाई जयसिंह के योगदान को स्पष्ट करें।

उत्तर:

सवाई जयसिंह ने 1725 ई० में नक्षत्रों की गति की गणना करने के लिए एक शुद्ध सारणी का निर्माण करवाया।

जयसिंह ने ज्योतिष विद्या पर जयसिंह कारिका नामक ग्रंथ लिखा। जयसिंह ने भारत में ज्योतिष के अध्ययन के लिए पाँच वेधशालाएँ बनवाई। ये जयपुर, दिल्ली, मथुरा, बनारस और उज्जैन में स्थित थीं। जयपुर का जंतर-मंतर पाँचों वेधशालाओं में सबसे बड़ी वेधशाला है।


जुलाई 2010 ई० में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित कर लिया गया है। जयपुर का प्राचीन नाम जयनगर था। सवाई जयसिंह ने आमेर की जगह जयपुर को कछवाहा राजवंश की राजधानी बनाया। जयपुर की स्थापना से पूर्व इस स्थान पर एक शिकार होदी स्थित थी। इसी होदी को सवाई जयसिंह ने बादल महल का रूप दे दिया और जयपुर शहर के निर्माण की शुरुआत की। सवाई जयसिंह अंतिम हिंदू शासक था, जिसने 1740 ई० में राजसूय/वाजपेय/अश्वमेध यज्ञ करवाया। यह यज्ञ करने

वाले ब्राह्ममणों के रहने के लिए सवाई जयसिंह ने जलमहलों का निर्माण करवाया।


प्रश्न 3.

‘हल्दीघाटी युद्ध’ पर निबंध लिखिए।

उत्तर:

महाराणा प्रताप ने और मुगलों की सेना के बीच हल्दी घाटी का युद्ध हुआ था। मुगलों की सेना का नेतृत्व मानसिंह कर रहे थे और दूसरी तरफ महाराणा प्रताप की सेना थी। महाराणा प्रताप ने गोगुंदा और खमनौर की पहाड़ियों के मध्य स्थित हल्दी घाटी नामक तंग घाटी में अपना पड़ाव डाला। इस घाटी में एक बार में एक आदमी ही प्रवेश कर सकता था। इसलिए सैनिकों की कमी होते हुए भी महाराणा प्रताप के लिए मोर्चाबंदी के लिए यह सर्वोत्तम स्थान था, जहाँ प्रताप के पहाड़ों से परिचित सैनिक आसानी से छिपकर आक्रमण कर सकते थे।


वहीं मुगल सैनिक भटक कर मेवाड़ के सैनिकों से टकराकर या भूखे प्यासे मरकर जीवन गॅवा सकते थे। अंत में दोनों सेनाएँ 18 जून, 1576 ई० को प्रात:काल युद्ध भेरी के साथ आमने-सामने हुई। राजपूतों ने मुगलों पर पहला वार इतना आक्रामक किया कि मुगल सैनिक चारों ओर जान बचाकर भागे। इस प्रथम चरण के युद्ध में हकीम खाँ सूर का नेतृत्व सफल रहा। मुगल इतिहासकार बदायूँनी खाँ जो कि मुगल सेना के साथ था, वह स्वयं भी उस युद्ध से भाग खड़ा हुआ। मुगलों की आरक्षित फौज के प्रभारी मिहतर खाँ ने यह झूठी अफवाह फैला दी की बादशाह अकबर स्वयं शाही सेना लेकर आ रहे हैं। अकबर के सहयोग की बात सुनकर मुगल सेना की हिम्मत बँधी और वो पुनः युद्ध के लिए तत्पर होकर आगे बढ़ी।


महाराणा प्रताप की नजर मुगल सेना के सेनापति मानसिंह पर पड़ी। स्वामीभक्त घोड़े चेतक ने स्वामी का संकेत समझकर अपने कदम उस ओर बढाए जिधर मुगल सेनापति मानसिंह ‘मरदाना’ नामक हाथी पर बैठा हुआ था। चेतक ने अपने पैर हाथी के सिर पर टिका दिए। महाराणा प्रताप ने अपने भाले का भरपूर प्रहार मानसिंह पर किया परंतु मानसिंह हौदे में छिप गया और उसके पीछे बैठा अंगरक्षक मारा गया व हौदे की छतरी का एक खंभा टूट गया।


इसी समय हाथी की पूँड़ में बँधे हुए जहरीले खंजर से चेतक की टाँग कट गई। उसी समय मुगलों की शाही सेना ने प्रताप को चारो ओर से घेर लिया। बड़ी सादड़ी का झाला मन्ना सेना को चीरते हुए राणा के पास पहुँचा और महाराणा से निवेदन किया कि आप राजचिह्न उतार कर मुझे दे दीजिए और आप इस समय युद्ध के मैदान से चले जाएँ इसी में मेवाड़ की की भलाई है। चेतक के घायल होने की स्थिति को देखकर राणा ने वैसा ही किया। राजचिह्न के बदलते ही सैकड़ों तलवारें झाला मन्ना पर टूट पड़ी। झाला मन्ना इन प्रहारों का भरपूर सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।

महाराणा प्रताप का स्वामी भक्त घोड़ा चेतक बलीचा गाँव में स्थित एक छोटा नाला पार करते हुए परलोक सिधार गया।

महाराणा प्रताप जो कभी भी किसी परिस्थिति में नहीं रोए परंतु चेतक की मृत्यु पर उनकी औखों से आँसू निकल पड़े।


प्रश्न 4.

मराठों के उदय में शिवाजी का योगदान बताइए।

उत्तर:

12 वर्ष की अल्प आयु में शिवाजी ने अपने पिता से पूना की जागीर प्राप्त की। सर्वप्रथम 1646 ई० में 19 वर्ष की

आयु में उन्होंने कुछ मावले युवकों का एक दल बनाकर पूना के निकट स्थित तोरण दुर्ग पर अधिकार कर लिया। 1646 ई० में ही उन्होंने बीजापुर के सुल्तान से रायगढ़, चाकन तथा 1647 ई० में बारामती, इन्द्रपुर, सिंहगढ़ तथा पुरंदर का दुर्ग छीन लिया। 1656 ई० में शिवाजी ने कोंकण में कल्याण और जावली का दुर्ग भी अधिकृत कर लिया। 1656 में ही उन्होंने अपनी राजधानी रायगढ़ में बनायी। शिवाजी के साम्राज्य विस्तार की नीति से रूष्ट होकर बीजापुर के सुल्तान ने 1659 ई० में अफजल खाँ नामक अपने सेनापति को उनका दमन करने के लिए भेजा। संधिवार्ता के दौरान अफजल खाँ द्वारा धोखा देने पर शिवाजी ने बघनखे से उसका पेट फाड़ डाला।


1663 ई० में दक्कन के मुगल वायसराय शाइस्ता खाँ को शिवाजी के दमनार्थ औरंगजेब ने नियुक्त किया, जिसने शिवाजी के केंद्र स्थल पूना पर अधिकार कर लिया। लेकिन शीघ्र ही शिवाजी ने शाइस्ता खाँ के शिविर पर रात्रि में आक्रमण किया, जिसमें उसे अपना एक पुत्र और अपनी तीन उँगलियाँ आँवाकर भागना पड़ा। 1664 ई० में शिवाजी ने मुगलों के अधीन सूरत को लूटा। इन सभी गतिविधियों से क्रुद्ध होकर औरंगजेब ने अपने मंत्री आमेर के राजा मिर्जा जयसिंह और दिलेर खान को भेजा। मुगल सेना ने उनके अनेक किले अधिकृत कर लिए। विवश होकर शिवाजी ने जयसिंह के साथ 1665 ई० में संधि कर ली जो पुरंदर की संधि के नाम से जाना जाता है।


1666 ई में शिवाजी को आगरा किले में नजरबंद कर लिया गया। लेकिन नवम्बर 1666 ई० में वे अपने पुत्र शम्भाजी के साथ गुप्त रूप से कैद से निकल भागे और सुरक्षित अपने घर पहुँचे। अगले वर्ष ही औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की उपाधि और बरार की जागीर प्रदान की। दो वर्ष तक शिवाजी ने शांति बनाए रखी। लेकिन 1670 ई० में उन्होंने विद्रोह करके मुगलों की अधीनता में चले जानेवाले अपने सभी किलों पर कब्जा कर लिया। खान देश के कुछ भू-भागों में स्थानीय मुगल पदाधिकारियों को सुरक्षा का वचन देकर उनसे चौथ वसूलने का लिखित समझौता भी उन्होंने किया। 1670 ई० में उन्होंने सूरत को दुबारा लूटा। 1674 ई० में रायगढ़ के दुर्ग में शिवाजी ने महाराष्ट्र के स्वतंत्र शासक के रूप में अपना राज्याभिषेक कराया। इस अवसर पर उन्होंने ‘छत्रपति’ की उपाधि भी धारण की। 1680 ई० में शिवाजी की मृत्यु हो गई। इस समय उनका मराठा राज्य बेलगाँव से लेकर तुंगभद्रा नदी के तट तक समस्त पश्चिमी कर्नाटक में विस्तृत था।


प्रश्न 5.

गुरुनानक देव का परिचय देते हुए सिख धर्म की प्रमुख शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

15 अप्रैल, 1469 ई० को गुरुनानक देव का जन्म हुआ। इनका विवाह सुलखनी के साथ हुआ। नानक की अध्यात्म

के प्रति रुचि थी। नानक ने ‘मानुष की जात सबै एक’ इसी तत्व का प्रचार करते हुए भारत भ्रमण किया। इनकी इस तरह की यात्राओं को उदासियाँ कहा जाता है। गुरुनानक देव की शिक्षाएँ


(i) एक ईश्वर में विश्वास, नाम की महानता और उपासना, गुरु की महानता।

(ii) मानव को शुभ कर्म करने पर बल दिया एवं जाति, पाति, ऊँच-नीच का विरोध कर समाज सुधार का कार्य किया।

(iii) लंगरप्रथा का प्रचलन, सत्संग के केंद्र मन्झियाँ की स्थापना की जानी चाहिए।  





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